द पब्लिक मिरर: देश के कई हिस्सों में पारा लगातार रिकॉर्ड तोड़ रहा है. दोपहर होते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है और गर्म हवा के थपेड़े यानी ‘हीट वेव’ (लू) लोगों को बीमार कर रही है। ऐसी स्थिति में केवल ‘ज्यादा पानी पीजिए’ जैसी आम सलाहें काफी नहीं हैं। इस जानलेवा गर्मी से सुरक्षित रहने के लिए हमें इसके पीछे के विज्ञान को समझना होगा।
चिकित्सकों और वैज्ञानिकों के अनुसार, हीट वेव से बचने के लिए शरीर के भीतर और बाहर के तापमान को संतुलित रखना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं उन वैज्ञानिक उपायों के बारे में जो आपको इस मौसम में ‘हीट स्ट्रोक’ से बचा सकते हैं:
1. थर्मो-रेगुलेशन: सिर्फ पानी नहीं, ‘इलेक्ट्रोलाइट्स’ हैं जरूरी
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, मानव शरीर अपने आंतरिक तापमान को 37^\circ\text{C} के आसपास बनाए रखने की कोशिश करता है। जब बाहर का तापमान बढ़ता है, तो शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा करता.है।
- लवणों की कमी: ज्यादा पसीना बहने से शरीर से सिर्फ पानी नहीं, बल्कि सोडियम, पोटैशियम और क्लोराइड जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी बाहर निकल जाते हैं। इसलिए डॉक्टरों की सलाह है कि सादे पानी के बजाय ORS (ओरल रीहाइड्रेशन साल्ट्स), नींबू-पानी, नारियल पानी या नमक-चीनी का घोल पीएं।
- प्यास का इंतजार न करें: जब आपको प्यास महसूस होती है, तो इसका मतलब है कि आपका शरीर पहले ही ‘माइल्ड डिहाइड्रेशन’ (पानी की कमी) का शिकार हो चुका है। इसलिए हर आधे घंटे में पानी पीते रहें।
- कैफीन से दूरी: चाय, कॉफी और सॉफ्ट ड्रिंक्स में कैफीन होता है, जो शरीर में ‘Diuretic’ (मूत्रवर्धक) की तरह काम करता है। इससे शरीर से पानी तेजी से बाहर निकलता है, जो इस मौसम में खतरनाक है।
2. ‘इवेपोरेटिव कूलिंग’: कपड़ों के चुनाव के पीछे का विज्ञान
जब पसीना त्वचा से हवा में उड़ता है (वाष्पीकरण), तो वह त्वचा की गर्मी को अपने साथ ले जाता है। इसे विज्ञान में Evaporative Cooling कहते हैं।
- सफेद और सूती कपड़े क्यों?: गहरे रंग सूरज की किरणों (Solar Radiation) को सोखते हैं, जबकि सफेद या हल्के रंग उन्हें परावर्तित (Reflect) कर देते हैं। सूती (Cotton) कपड़ा पसीने को सोखकर हवा को आर-पार जाने देता है, जिससे शरीर प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है।
- इमरजेंसी कूलिंग: यदि कोई व्यक्ति धूप से आने के बाद अत्यधिक थका हुआ या गर्म महसूस कर रहा है, तो उसके माथे, गर्दन और बगल (Armpits) पर सामान्य पानी की गीली पट्टियां रखें। इन हिस्सों में मुख्य रक्त धमनियां त्वचा के काफी करीब होती हैं, जिससे खून जल्दी ठंडा होता है और शरीर का तापमान तुरंत गिरता है।
3. घरों को ‘ग्रीनहाउस इफेक्ट’ से बचाएं
गर्मियों में अक्सर घरों के अंदर की हवा बाहर से ज्यादा गर्म हो जाती है। इसे रोकने के लिए भी वैज्ञानिक तरीके अपनाए जा सकते हैं:
- थर्मल इंसुलेशन: दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच घर की उन खिड़कियों को पूरी तरह बंद रखें और गहरे रंग के पर्दे डाल दें, जहां सीधे धूप आती है। यह घर के अंदर ‘ग्रीनहाउस इफेक्ट’ (गर्मी का कैद होना) को रोकता है।
- क्रॉस वेंटिलेशन: शाम को जब बाहर का तापमान कम हो जाए, तब घर की खिड़कियां और दरवाजे खोलें ताकि गर्म हवा बाहर निकल सके।
- कूलर चलाने का सही तरीका: अगर आप कूलर का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो कमरे को पूरी तरह बंद न करें। कूलर हवा में नमी (Humidity) बढ़ाता है। अगर वेंटिलेशन नहीं होगा, तो उमस बढ़ेगी और पसीना सूखना बंद हो जाएगा। इसलिए एक खिड़की या दरवाजा थोड़ा खुला रखें।
4. मेटाबॉलिज्म को रखें धीमा
हम जो कुछ भी खाते हैं, उसे पचाने के लिए शरीर को ऊर्जा लगानी पड़ती है, जिससे आंतरिक रूप से Metabolic Heat (चयापचय गर्मी) पैदा होती है।
- हल्का भोजन: गर्मियों में भारी, तैलीय और अधिक प्रोटीन युक्त भोजन से बचें। ऐसा भोजन पचाने में शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे अंदरूनी गर्मी बढ़ती है।
- ताजा खान-पान: इस मौसम में उच्च तापमान के कारण भोजन में बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपते हैं। बासी भोजन से फूड पॉइजनिंग का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जिससे उल्टी-दस्त और गंभीर डिहाइड्रेशन हो सकता है।
🚨 रेड अलर्ट: इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों के मुताबिक, यदि आपके आस-पास किसी व्यक्ति को तेज सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी जैसा महसूस होना, धड़कन तेज होना या अचानक पसीना आना बंद हो जाना (त्वचा का लाल और सूखा होना) जैसी समस्या हो, तो यह ‘हीट स्ट्रोक’ (लू लगना) का गंभीर संकेत है। ऐसे में व्यक्ति को तुरंत छांव या ठंडी जगह पर ले जाएं, गीले कपड़े से बदन पोंछें और बिना देर किए नजदीकी अस्पताल ले जाएं।
- सजय रहें, वैज्ञानिक तरीके अपनाएं और सुरक्षित रहें!








