मुगलसराय/चंदौली। चंदौली जिले के मुगलसराय (पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर) इलाके में जिला प्रशासन की प्रस्तावित ध्वस्तीकरण (demolition) की कार्रवाई पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि प्रशासन कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना और मकान मालिकों को दोबारा वैध नोटिस दिए बिना किसी भी घर पर बुलडोजर नहीं चला सकता।
न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने विजय कुमार और 22 अन्य स्थानीय निवासियों द्वारा दायर याचिका (Writ C No. 19707 of 2026) पर सुनवाई करते हुए यह अहम आदेश जारी किया है।
- मकान मालिकों का दावा: याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह जमीन ‘उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन अधिनियम 1950’ के तहत पहले जमींदार के पक्ष में तय हुई थी। इसके बाद उन्होंने वैध पंजीकृत बैनामे (Registered Sale Deeds) के जरिए जमींदार से यह जमीन खरीदी और सालों से यहां अपने मकान बनाकर शांतिपूर्ण और कानूनी रूप से रह रहे हैं।
प्रशासन के पुराने नोटिसों पर कोर्ट ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान जब सरकारी वकील ने कोर्ट के सामने प्रशासन के निर्देशों और पूर्व में जारी किए गए नोटिसों का ब्योरा रखा, तो कोर्ट ने उसमें बड़ी खामी पकड़ी। माननीय जजों ने नोट किया कि रिकॉर्ड से यह कहीं भी साफ नहीं हो रहा है कि प्रशासन द्वारा भेजे गए नोटिस असल में सही और संबंधित मकान मालिकों तक पहुंचे भी थे या नहीं।
हालांकि, सरकारी वकील ने कोर्ट को यह भरोसा दिलाया कि प्रशासन कानून की उचित प्रक्रिया को अपनाए बिना किसी भी घर को नहीं गिराएगा।
हाईकोर्ट का सख्त आदेश: प्रशासन को मानने होंगे ये 4 नियम
सरकारी आश्वासन और नोटिसों की खामियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने याचिका को निस्तारित (Dispose) करते हुए स्थानीय प्रशासन को सख्त हिदायत दी है:
- अचानक कार्रवाई पर रोक: प्रशासन रातों-रात या अचानक आकर कोई ध्वस्तीकरण अभियान शुरू नहीं कर सकता।
- नया नोटिस देना अनिवार्य: कोई भी कदम उठाने से पहले सक्षम प्राधिकारी को सभी प्रभावित मकान मालिकों को नए सिरे से (Fresh) व्यक्तिगत नोटिस तामील कराना होगा।
- पक्ष रखने का पूरा मौका: नया नोटिस मिलने के बाद जब स्थानीय निवासी अपना जवाब दाखिल करेंगे, तो प्रशासन को कानूनन उनकी बात सुननी होगी और निष्पक्ष सुनवाई का मौका देना होगा।
- सबूत दिखाना जरूरी: कोई भी अंतिम आदेश पारित करने से पहले प्रशासन को वे सभी दस्तावेज, नक्शे और सामग्रियां याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध करानी होंगी, जिनके दम पर प्रशासन उस जमीन को सड़क या सरकारी बता रहा है।








