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UP SI Exam Controversy: ‘दरोगा भर्ती परीक्षा के सवाल पर मचा बवाल’; मुगलसराय विधायक ने जताई आपत्ति

 

लखनऊ/उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश पुलिस उप-निरीक्षक (UP SI) भर्ती परीक्षा एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार विवाद किसी पेपर लीक को लेकर नहीं, बल्कि परीक्षा पत्र में पूछे गए एक ‘विवादास्पद’ सवाल को लेकर है। सोशल मीडिया पर ‘पंडित विवाद’ के नाम से यह मुद्दा तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने अभ्यर्थियों और एक विशेष समुदाय के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

परीक्षा के दौरान ‘मानसिक अभिरुचि’ (Mental Aptitude) खंड में एक प्रश्न पूछा गया, जिसमें तर्कशक्ति का परीक्षण करने के लिए एक उदाहरण का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि इस प्रश्न की भाषा और संदर्भ ने एक विशिष्ट जाति (पंडित/ब्राह्मण) को नकारात्मक और ‘अपराधी’ छवि के रूप में चित्रित किया है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रश्न पत्र सेट करने वालों ने संवेदनशीलता का ध्यान नहीं रखा। सोशल मीडिया पर युवाओं का कहना है, “दिमाग खराब है, सीधे अपराधी बना दिया”; यह जुमला अब इस विरोध का मुख्य नारा बन चुका है।

सोशल मीडिया पर ‘उबाल’ और मांग

ट्विटर (X) और फेसबुक पर छात्र और विभिन्न संगठन उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPBPB) को टैग कर अपनी नाराजगी जता रहे हैं। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

  • स्पष्टीकरण और माफी: भर्ती बोर्ड इस विवादास्पद प्रश्न के चयन पर अपनी स्थिति साफ करे।

  • प्रश्न को हटाना: विवादित प्रश्न को परीक्षा के मूल्यांकन से बाहर किया जाए ताकि किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे।

  • मर्यादा का पालन: भविष्य में होने वाली परीक्षाओं में भाषाई मर्यादा और सामाजिक समरसता का विशेष ध्यान रखा जाए।

विधायक ने जताई कड़ी आपत्ति, मुख्यमंत्री से की कार्रवाई की मांग

मुगलसराय विधायक रमेश जायसवाल ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रश्न पत्र के विकल्पों में “पंडित” शब्द के इस्तेमाल को अनुचित ठहराते हुए इसकी घोर निंदा की।

विधायक ने अपने बयान में कहा:

“S.I. की परीक्षा में पूछे गए प्रश्न के विकल्प में ‘पंडित’ शब्द को डालना सरासर गलत है। ब्राह्मण समाज एक विद्वत समाज है, जिसके प्रयासों से देश में सनातन और वैदिकता समानांतर स्थापित है। प्रदेश में इस तरह का असंतुलन पैदा करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।”

संपादकीय स्पष्टीकरण (Editorial Note):

“द पब्लिक मिरर” हमेशा देशहित और सामाजिक सौहार्द को सर्वोपरि मानता है। हमारा उद्देश्य समाज के हर वर्ग की भावनाओं का सम्मान करना और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से जनता की आवाज़ शासन-प्रशासन तक पहुँचाना है।

उपरोक्त खबर क्षेत्रीय विधायक श्री रमेश जायसवाल द्वारा उनके आधिकारिक फेसबुक हैंडल से व्यक्त किए गए विचारों और मांगों पर आधारित है। ‘द पब्लिक मिरर’ का उद्देश्य किसी भी जाति, धर्म या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है, बल्कि एक जिम्मेदार न्यूज़ पोर्टल के रूप में केवल लोक-महत्व के विषयों पर रिपोर्टिंग करना है। हम प्रदेश में शांति, एकता और संवैधानिक मर्यादाओं के साथ विकास के पक्षधर हैं।

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